FII Kya Hai: विदेशी संस्थागत निवेश क्या है? FII और FDI के बीच अंतर|

FII Kya Hai: दोस्तों जब भी बाजार में विदेशी इन्वेस्टमेंट की बात आती है तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेश एफपीआई और विदेशी संस्थागत निवेश एफआईआई का जिक्र जरूर होता है| दोनों ही विदेशी निवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं शेयर मार्केट की खबर में आपने भी सुना या पढ़ा होगा कि कल बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेदक या विदेशी संस्थागत निवेश बाजार में खरीददार थे जिन्होंने बाजार में इतने करोड रुपए के शेयर खरीदे|

इसलिए आज के लेख में हम आपको FII Kya Hai के बारे में बताने वाले हैं| यदि आप एफआईआई क्या है से संबंधित जानकारी नहीं जानते हैं तो आप हमारे लेख को अंत तक जरूर पढ़ें|

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FII क्या है? FII Kya Hai

एफआईआई को विदेशी संस्थागत निवेशक कहते हैं जब कोई विदेशी संस्थान हमारे देश के शेयर मार्केट बीमा बैंकिंग आदि में निवेश करते हैं तो इस प्रकार से किया जाने वाला निवेश एफआईआई अर्थात विदेशी संस्थागत निवेश कहलाता है यह ऐसे निवेशक होते हैं जो अपने देश की पूंजी को किसी अन्य देश में निवेश करते हैं विदेशी संस्थागत निवेशक एक बड़ा निवेशक होता है एफआईआई  हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|



FII Kya Hai

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FII Full Form

एफआईआई का फुल फॉर्म Foreign Institutional Investors है|

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एफडीआई क्या है?

किसी एक देश की कंपनी का दूसरा देश में किया गया निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अर्थात एफडीआई कहलाता है ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उसे कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है आमतौर पर यह माना जाता है कि किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए कम से कम कंपनी में विदेशी निवेशक को 10 फ़ीसदी शेयर खरीदना पड़ता है इसके साथ उसे निवेश वाली कंपनी में मताधिकार भी हासिल करना पड़ता है|

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FII और FDI में अंतर

  • एफडीआई में किसी विदेशी कंपनी द्वारा देश में प्रत्यक्ष निवेश होता है जबकि फिर निवेदक शेयरों म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं एफआईआई पार्टिसिपेट नोट सरकारी प्रतिभूतियों कमर्शियल पेपर आदि का निवेश माध्यम बनते हैं परंतु एफडीआई को प्रकृति स्थाई होती है लेकिन बाजार में उथल-पुथल की एफ आई आई जल्दी से बिक्री कर निकल जाते हैं|
  • एफडीआई के अंतर्गत इस प्रक्रिया को फॉरेन मैनेजमेंट द्वारा नियंत्रित किया जाता है जबकि एफआईआई में मैनेजमेंट कंट्रोल की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह सेकेंडरी मार्केट का हाथ होता है|
  • एफआईआई लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दोनों विजन पर वर्क करती है जबकि एफडीआई लॉन्ग टर्म विजन पर वर्क करती है|
  • एफआईआई में लॉकिंग पीरियड नहीं होता जबकि एफडी में लोगों पीरियड होता है|
  • एफआईआई में निवेश 10% से कम होता है जबकि एफडीआई में निवेश 10% से ऊपर होता है|

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भारतीय कंपनी जहां 50% से अधिक FII की भागीदारी

  • बाटा इंडिया – 78 प्रतिशत
  • इनडुरेंस टेक्नोलॉजी – 66 प्रतिशत
  • ट्राई डेंट – 66 प्रतिशत
  • कोल इंडिया – 66 प्रतिशत
  • ग्रैन्यूल्स इंडिया -63 प्रतिशत
  • वैभव ग्लोबल – 52 प्रतिशत
  • उषा मार्टिन – 51 प्रतिशत

किसी भी एफआईआई या एफडीआई को भारतीय बाजार में निवेश करने से पहले अपना पंजीकरण भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड तथा भारतीय रिजर्व बैंक के पास करवाना होता है और उनके नियमों का पालन करना होता है|

FAQ’s

FPI और FII में क्या अंतर है?

एफबीआई और एफआईआई के बीच कोई अंतर नहीं है|

भारत में एफडीआई कौन करता है?

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग|

एफडीआई का नुकसान क्या है?

एफडीआई से रणनीतिक उद्योग और संसाधनों पर नियंत्रण खत्म हो सकता है और सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है|

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